स्कैन का दिन इतना कठिन क्यों होता है?
क्योंकि यही वह दिन है जब हालात बदल सकते हैं, और स्कैन और नतीजे के बीच का इंतज़ार अपनी ही तरह का बुरा होता है। मरीज़ों के बीच इसका एक नाम है: स्कैनज़ाइटी।
पूछिए कि इंतज़ार कितना लंबा होगा और कौन फ़ोन करेगा, क्योंकि अनजान इंतज़ार जाने-पहचाने से कहीं बुरा है। कुछ टीमें पूछने पर स्कैन और नतीजे को क़रीब कर सकती हैं।
दो डॉक्टरों ने लिखा। अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और कैंसर रिसर्च यूके की मरीज़ों के लिए दी गई जानकारी से मिलाकर जाँचा गया। अंग्रेज़ी कार्ड से अनुवादित। हिंदी जानने वाले किसी चिकित्सक से इस अनुवाद की समीक्षा करवाने की योजना है।